यूपी -बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री जी के उद्बोधन के प्रमुख अंश*
यूपी-बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री जी के उद्बोधन के प्रमुख अंश*
● मैं आभारी हूँ कि 26 मई को माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत बजट पर नेता प्रतिपक्ष सहित 124 सदस्यों ने अपने अमूल्य विचारों को रखा है। सत्ता पक्ष के 77 और विपक्ष के 49 सदस्यों ने अपने विचार रखे। अपने महत्वपूर्ण सुझावों के माध्यम से प्रदेश के विकास के लिए मिलकर काम करने के सम्बंध में चर्चा की, सुझाव दिए।
● कई वर्षों के बाद सदन में इतनी गंभीर चर्चा हो रही है। इससे सदन की गरिमा बढ़ी है और इससे आमजन के मन मे सदन के प्रति विश्वास बढ़ेगा। सभी सदस्यों के प्रति आभार।
● हमारा प्रयास होगा को सदस्यों की भावनाओं के अनुरूप नीतियों को लागू किया जाए।
● नेता प्रतिपक्ष अपने भाषण में कभी कभी फिसल भी जा रहे थे। वो ऐसे मुद्दे पर आ गए जिनका बजट से कोई वास्ता नहीं था। इस पर मुझे दुष्यंत कुमार का शेर याद आता है….
‘कैसे कैसे मंजर नजर आने लगे हैं।
गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं।।”
● शब्द ब्रम्ह है। सदन में कहा गया हर एक शब्द यहां भावी पीढ़ी के लिए मार्गदर्शिका के रूप में होगा। हमें इसका ध्यान रखना चाहिए।
● नेता प्रतिपक्ष बता रहे थे कि वो एक स्कूल में गए तो बच्चे से उन्हें अपने बारे में पूछा। बच्चे ने उन्हें राहुल गांधी के रूप में पहचाना।
● बच्चे मन के सच्चे होते हैं। भोले भाले होते हैं। जो कहा होगा सोच कर कहा होगा। वैसे भी दोनों में कोई बड़ा अंतर नहीं है। अंतर यही है कि वो देश के बाहर देश की बुराई करते हैं आप प्रदेश के बाहर उत्तर प्रदेश की बुराई करते हैं।
● नेता प्रतिपक्ष ने समाजवाद के बहाने प्रधानमंत्री जी के प्रयासों को स्वीकार किया है यह अच्छा है। हमारी योजनाओ का आधार पंडित दीनदयाल जी के ‘अंत्योदय’ विचार हैं।
● अभी मैं अन्नदाता किसानों को पीएम किसान योजना अंतर्गत 11वीं क़िस्त भेजने के एक कार्यक्रम में था। उत्तर प्रदेश के 2.55 करोड़ किसान पीएम किसान योजना से लाभान्वित हुए हैं।
● आप समस्या के बारे में सोचते हैं, हम समाधान के बारे में सोचते हैं। फर्क साफ है।
● उत्तम समय कभी नहीं आता। समय को उत्तम बनाना होता है। सपा और भाजपा में यही अन्तर है।
आइडिया फॉर न्यूज के लिए लखनऊ से राजेंद्र सिंह के साथ ब्यूरो रिपोर्ट।
