चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट खुले: 21 किमी की कठिन चढ़ाई पार कर पहुंचे श्रद्धालु, मुखाकृति के हुए दिव्य दर्शन
रुद्रनाथ/चमोली: ‘बम-बम भोले’ और ‘जय रुद्रनाथ’ के उद्घोष के साथ पंच केदारों में से एक, चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट आज श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। समुद्रतल से 11 हजार 800 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पावन धाम के कपाट दोपहर ठीक 1 बजकर 40 मिनट पर विधि-विधान और विशेष पूजा-अर्चना के बाद खोले गए। कपाट खुलने के ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रुद्रनाथ धाम पहुंचे थे।
बुगला फूलों को हटाकर हुआ भगवान का भव्य श्रृंगार
आज दोपहर मंदिर के मुख्य पुजारी हरीश भट्ट ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कपाट खोलने की प्रक्रिया शुरू की। परंपरा के अनुसार, शीतकाल में कपाट बंद होने के दौरान भगवान रुद्रनाथ के विग्रह को स्थानीय ‘बुगला’ फूलों से पूरी तरह ढका जाता है।
पुजारी ने विग्रह से इन पवित्र बुगला फूलों को हटाया, जिसके बाद भगवान रुद्रनाथ का विशेष श्रृंगार कर भव्य आरती उतारी गई। विग्रह से हटाए गए इन बुगला फूलों को वहां मौजूद श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किया गया, जिसे पाकर भक्त निहाल हो उठे।
गुफा में स्थापित है मंदिर, होती है शिव के ‘मुख’ की पूजा
भगवान रुद्रनाथ का यह पावन मंदिर एक विशाल पहाड़ी पर प्राकृतिक पत्थरों की गुफा के भीतर बना हुआ है। चारों ओर मखमली बुग्यालों (घास के मैदानों) से घिरे इस अलौकिक धाम में भगवान शिव के ‘मुख’ (चेहरे) की पूजा की जाती है।
ग्रीष्मकाल (6 माह): मई से अक्टूबर तक भगवान रुद्रनाथ की पूजा इसी धाम में होती है।
शीतकाल (6 माह): भारी बर्फबारी के कारण शीतकाल में भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में संपन्न की जाती है।
रुद्रनाथ धाम की यात्रा को पंच केदारों में सबसे कठिन माना जाता है। श्रद्धालुओं को यहां पहुंचने के लिए चमोली के ‘सगर’ गांव से लगभग 21 किलोमीटर की बेहद खड़ी और थका देने वाली पैदल चढ़ाई पार करनी पड़ती है। दुर्गम रास्ता होने के बावजूद भक्तों की आस्था के आगे यह मुश्किलें बौनी साबित हुईं।
