पतंजलि जैविक कृषि को देगा बढ़ावा–मुख्यमन्त्री ! – Idea for News

पतंजलि जैविक कृषि को देगा बढ़ावा–मुख्यमन्त्री !

पतंजलि जैविक कृषि को देगा बढ़ावा–मुख्यमन्त्री !

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और स्वामी रामदेव की उपस्थिति में बुधवार को मुख्यमंत्री आवास पर उत्तराखण्ड सरकार और पतंजलि के मध्य ’’सहयोग’’ कार्यक्रम पर विस्तृत विचार विमर्श किया गया। इस परिचर्चा में मुख्य रूप से 5 क्षेत्रों में आपस में सहयोग करने पर सहमति बनी। इन क्षेत्रों में उत्तराखण्ड को जैविक कृषि एवं जड़ीबूटी राज्य बनाना, राज्य के मोटे अनाज की व्यवसायिक खपत को बढ़ाना, राज्य में आयुष ग्रामों की स्थापना करना, एक विशाल गौधाम(गौशाला) की स्थापना करना और पर्यटन को बढ़ावा देना सम्मिलित है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि यह सारे सेक्टर राज्य की समृद्धि और खुशहाली की दृष्टि से गेम चेंजर साबित होंगे। इन सारे क्षेत्रों में सम्भावनाओं पर अभी तक काफी विचार-विमर्श हुआ है, परन्तु अब इसमें कुछ करके दिखाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार कडे और साहसिक फैसले लेने पर नही हिचकेगी। जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे एक माह के अन्दर सभी क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजना तैयार करें, जिसकी आज की बैठक से ठीक एक माह बाद समीक्षा की जायेगी। ठोस कार्ययोजना के आधार पर राज्य सरकार और पतंजलि के बीच आवश्यक समझौते भी किये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जड़ीबूटी, औद्यानिकी, योग, आयुर्वेद और पर्यटन से राज्य के लोगो की आमदनी बढ़ाने पर कार्य किया जायेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना बहुत आवश्यक है। उन्होंने सभी अधिकारियों को इस दिशा में ठोस रोड मैप बनाकर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। 

स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि संस्थान उत्तराखण्ड के किसानों को उनके उत्पादों के लिए प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रूपये से अधिक का भुगतान करने में सक्षम है। सिक्किम जिसे हाल ही में आॅर्गेनिक स्टेट का दर्जा दिया गया है, उससे कही अधिक भूभाग पर उत्तराखण्ड में आॅर्गेनिक खेती हो रही है। पतंजलि राज्य के उत्पादों के लिए बाईबैक सिस्टम बना रहा है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के 13 जिले 13 नये पर्यटन स्थल बनाने के लक्ष्य की सराहना करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि सभी नये पर्यटन स्थलों पर पतंजलि आयुष ग्राम की स्थापना में सहयोग देने को तैयार है। राज्य सरकार के सहयोग से एक विशाल गौशाला की स्थापना करने की योजना है, जिसमें 40 से 60 लीटर दूध देने वाली गायों की नस्ल तैयार की जायेगी। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि की रिसर्च लैब और अन्य सुविधाओं को आयुर्वेद के शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए खोला जायेगा। पतंजलि के 300 से अधिक वनस्पति विज्ञानी राज्य की एक-एक जड़ीबूटी और पौधे का सर्वेक्षण कर उनका डाॅक्यूमेंटेशन कर सकते है। राज्य में होने वाले 5 हजार कुंतल ऊन को पतंजलि द्वारा खरीदने पर भी सैद्धांतिक सहमति व्यक्त की गई। उन्होंने गोपेश्वर में स्थित जड़ी बूटी शोध संस्थान द्वारा उत्पादित किये जाने वाली सभी जड़ीबूटियों को खरीदने की सहमति भी दी। इससे पूर्व परिचर्चा का प्रारम्भ करते हुए आयुष एवं वन मंत्री डाॅ.हरक सिंह रावत ने योग एवं आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भो में स्थापित करते हुए इनके माध्यम से रोजगार सृजन पर बल दिया।   

देहरादून से आइडिया फॉर न्यूज़ के लिए अमित सिंह  नेगी की रिपोर्ट!

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