फर्जी प्रमाणपत्र  बना कर प्रो0.जोशी ने किया  कब्जा  हाई कोर्ट के आदेश का इंतजार राजभवन खामोश।

 

फर्जी प्रमाणपत्र  बना कर प्रो0.जोशी ने किया  कब्जा  हाई कोर्ट के आदेश का इंतजार राजभवन खामोश ।

 

फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रो0 जोशी ने किया आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर कब्जा
हटाने के लिए हाई कोर्ट के आदेश का इंतजार राजभवन खामोश।

क्या प्रो0 सुनील कुमार जोशी है इतने प्रभावशाली जिनकें आगे राजभवन भी खामोश।
आयुर्वेद विश्विद्यालय के रिकार्ड रूमों में कुलपति प्रो0 सुनील कुमार जोशा का अवैध कब्जा। शासन/राजभवन है खामोश।
रिकार्ड रूमों में दबें है बड़े घोटालों की फाईलें।
जब कुलपति पद पर विश्वविद्यालय के अधिनियम के अनुसार प्रो0 सुनील कुमार जोशी योग्य नही है तो क्यों वेतन दिया जा रहा है।
अयोग्य लोग कर रहे है योग्य लोगों पर शासन विश्वविद्यालय को बना रखा है जंग का अखाडा

 

जब कुलपति पद पर विश्वविद्यालय के अधिनियम के अनुसार प्रो0 सुनील कुमार जोशी योग्य नही है तो क्यों वेतन दिया जा रहा है।
अयोग्य लोग कर रहे है योग्य लोगों पर शासन विश्वविद्यालय को बना रखा है जंग का अखाडा।
मा0 उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय, नैनीताल में योजित रिट पिटीशन संख्या- 567/2021 (एस0बी0) डॉ0 विनोद कुमार चौहान बनाम उत्तराखण्ड राज्य व अन्य में वादी डॉ0 विनोद कुमार चौहान द्वारा रिट याचिका में डॉ0 सुनिल कुमार जोशी, कुलपति की योग्यता को चुनौती दी गयी है। जिसमें सचिव आयुष एवं आयुष शिक्षा उŸाराखण्ड शासन एवं आयुर्वेद विश्वविद्यालय की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर दिया गया है। इस सम्बन्ध अवगत कराना है कि कुलपति प्रो0 सुनील कुमार जोशी दिनांक 29.12.2014 प्रोफेसर पद पर प्रोन्नत हुए तथा दिनांक 14 जुलाई, 2020 को कुलपति नियुक्ति हुए है। वर्ष 2014 से वर्ष 2020 तक की अवधि में उनका प्रोफेसर पद का लगभग कुल अनुभव 06 वर्ष का है विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकानुसार कुलपति पद पर चयन हेतु प्रोफेसर पद पर न्यूनतम 10 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है इस प्रकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकानुसार प्रो0 सुनील कुमार जोशी का प्रोफेसर पद पर कुल अनुभव लगभग 06 वर्ष होने के कारण कुलपति पद की योग्यता पूर्ण नही करते है तथा फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर कुलपति का पद हथीआ लिया है गुप्त सूत्रों से पता चला कि यह पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रीवेन्द्र सिंह रावत के बहुत की करिबी रहे है।
अतः प्रो0 सुनील कुमार जोशी कुलपति पद की न्यूनतम योग्यता धारित न करने पर भी आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कुलपति के पद पर बने हुए है। मा0 उच्च न्यायालय द्वारा उŸाराखण्ड के तीन विश्वविद्यालयों- दून विश्वविद्यालय, सोबन सिंह जीन विश्वविद्यालय अल्मोड़ा एवं कुमाऊ विश्विद्यालय नैनीताल के कुलपतियों कों 10 वर्ष प्रोफेसर का अनुभव नही होने के कारण हटाया जा चुका है।
प्रो0 सुनील कुमार जोशी के पूर्व राज्यपाल श्रीमति बेबी रानी मौर्या तथा पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रीवेन्द्र सिंह रावत से निकट संबंध होने के कारण पैनल में नाम नही हो के बावजूद आयुर्वेद विश्वविद्यालय का कुलपति वर्ष 2020 में बना दिया गया। जबकि पैनल में वरिष्ठत प्रो0 अरूण कुमार त्रिपाठी, प्रो0 राधा बल्लभ सती आदि जो पूर्णतः योग्यता रखते थे का नाम काट कर जुगाडु अयोग्य प्रो0 सुनील कुमार जोशी को कुलपति बना दिया गया । अब जबकि मा0 उच्च न्यायालय से इनका हटना तय है इस विषय पर हमेशा बोलने वाले आयुष मंत्री हरक सिंह रावत व सेना पृष्ठ भूमि के ईमानदार लै0 जनरल गुरूमित सिंह राज्यपाल महोदय किन कारणों से चुप्पी साधे क्या प्रो0 सुनील कुमार जोशी इतने प्रभावशाली है कि शासन/प्रशासन खामोश है। अयोग्य लोगों को कुलपति जैसे पद की जिम्मेदारी दी गयी है। जिन्हे विश्वविद्यालय चलाने का कोई अनुभाव नही है। जबकि इनको तत्काल कार्यवाही करते हुये किसी योग्य व्यक्ति को कुलपति पद का प्रभार देकर राज्य विश्वविद्यालयों की छवि उच्च शिक्षा जगत में बचायी जा सकें।

इस संबंध में याचिकाकर्ता डॉ0 विनोद कुमार चौहान एवं अधिवक्ता प्रदीप सिंह चौहान मो0 नं0- 9837211702 एवं के पूर्व प्रमुख सचिव, न्याय/विधि परामर्शी/विधायी व संसदीय कार्य श्री जयदेव सिंह मो0 नं0- 9458940100, 6395330279 से इस सम्बन्ध में विधि का पक्ष जाना जा सकता है।

आइडिया फ़ॉर न्यूज़ के लिए देहरादून से अमित सिंह नेगी की रिपोर्ट।

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